शिक्षामित्रों की परीक्षा समय से कराने के निर्देश

  • शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन न हो पाने से सहायक अध्यापक बने 58129 शिक्षामित्रों व 5000 बीटीसी प्रशिक्षितों की अटकी है तनख्वाह
  • निदेशक एससीईआरटी को भेजा कार्रवाई के लिए पत्र, सत्यापन अक्टूबर के अंत तक कराने का आश्वासन
लखनऊ। प्रदेश के 58 हजार शिक्षामित्रों व पांच हजार बीटीसी प्रशिक्षितों को सहायक अध्यापक बनाये जाने के बाद अब उनकी तनख्वाह के लिए शासन पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि शासन ने शिक्षकों के वेतन के मद में 17218 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर करके वित्त नियंत्रक बेसिक शिक्षा निदेशालय को भेजी है, उन्हें जिलेवार आवंटन करने को कहा गया है। दूसरी ओर शिक्षामित्रों के संगठन आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने शुक्रवार को बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोबिंद चौधरी व बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश बाबू शर्मा से अलग-अलग मिलकर अपनी सात सूत्री मांगों को रखा। बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि एसोसिएशन के उठाये मुद्दों में शिक्षामित्रों के दूसरे बैच के समायोजन के लिए परीक्षा समय से कराने की मांग पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है और जल्द ही इस बाबत आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है। शिक्षामित्रों के प्रतिनिधियों ने बेसिक शिक्षा निदेशक से तनख्वाह को लेकर मांग की। निदेशक ने उन्हें अक्टूबर के अंत तक शिक्षामित्रों के कागजातों का सत्यापन करा लेने के भरोसा देते हुए इसके बाद तनख्वाह निकलने का रास्ता साफ हो जाएगा। आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र शाही ने बताया कि मंत्री और निदेशक दोनों से बातचीत काफी सकारात्मक रही है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने दूरस्थ बीटीसी से प्रथम चरण में प्रशिक्षण पूरा करने वाले 58129 शिक्षामित्रों को परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापक पदों पर समायोजित कर दिया है। पहले चरण का समायोजन 6 अगस्त तक पूरा कर लिया गया था लेकिन शिक्षामित्र से शिक्षक बने इन लोगों को अभी न मानदेय मिला है और न ही सहायक अध्यापक की तनख्वाह। इसकी वजह उनकी सेवा पुस्तिका और शैक्षिक कागजातों का सत्यापन न होना बताया जाता है। इस काम को पूरा कराने में एक से डेढ़ महीने लगना तय है।

सूत्रों का कहना है कि मिर्जापुर जिले में शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बनायी गयी शिक्षिका पुष्पलता की तनख्वाह जारी कर दी गयी है। इस मामले में विभागीय अफसरों को शासन से निर्देश थे और अकेले उसके कागजातों का सत्यापन कराकर तनख्वाह रिलीज करा दी गयी। इसके बाद से ही सहायक अध्यापक बनो शिक्षामित्रों की ओर से दबाव बढ़ गया था, कई संगठनों ने तो वेरीफिकेशन न होने पर शासन स्तर तक विरोध दर्ज कराया था। इसी कड़ी में आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने बेसिक शिक्षामंत्री श्री चौधरी व निदेशक श्री शर्मा से मिलकर जल्द कारवाई की मांग की है। मालूम हो कि शिक्षामित्रों की दूरस्थ बीटीसी से प्रशिक्षण कराने को लेकर सात फरवरी 2013 को जारी शासनादेश में सितम्बर 2014 में दूसरे बैच के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा करानी थी। सितम्बर पूरा होने को है, लेकिन अभी तक जिलों में प्रशिक्षण बाद होने वाली परीक्षा के फार्म भी नहीं भराये गये हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ जिलों ने परीक्षाफार्म भरा लिये गये हैं, लेकिन उन्हें परीक्षा कराने को लेकर कोई निर्देश नहीं मिला है। बीटीसी की परीक्षा के लिए अलग से परीक्षा नियामक प्राधिकारी है, जिस पर परीक्षा कराने व रिजल्ट घोषित की जिम्मेदारी रहती है। 

खबर साभार : राष्ट्रीय सहारा

शिक्षमित्रों के वेतन के लिए दो माह का बजट स्वीकृत

शिक्षमित्रों के समायोजन के खिलाफ एक और याचिका : 9 जुलाई को होगी सुनवाई



  • नियमों को दरकिनार कर लाभ देने का आरोप 
  • नौ जुलाई को हाई कोर्ट करेगा याचिका पर सुनवाई

बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों के समायोजन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। बीटीसी संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश एवं टेट मोर्चा उत्तर प्रदेश ने इस संबंध में याचिका दायर की है।1 आरोप है कि प्रदेश सरकार नियमों की अनदेखी करके शिक्षामित्रों को लाभ देने पर उतारू है। इसमें उच्चतम न्यायालय के फरमान एवं मानव संसाधन विकास मंत्रलय के निर्देशों की अनदेखी हो रही है। प्रकरण की सुनवाई नौ जुलाई को होगी। प्रदेश में 2001-02 में संविदा के आधार पर शिक्षामित्रों को नियुक्ति मिली थी। अधिकांश शिक्षामित्र हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट पास थे। इसमें आरक्षण प्रक्रिया लागू नहीं हुई थी।

सरकार ने शिक्षामित्रों को स्नातक कराने के लिए अनुमति ली और दूरस्थ शिक्षा के तहत कई ने स्नातक किया, वहीं करीब आधे से अधिक शिक्षामित्रों ने नियमों को ताक पर रखकर कॉलेजों में रेगुलर स्नातक किया। बीटीसी संघर्ष समिति के एहतेशाम ने बताया कि इन विसंगतियों को लेकर संतोष कुमार मिश्र ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। प्रकरण में निर्णय सुरक्षित रखा गया है। इसके बाद भी प्रदेश सरकार टीईटी के बिना समायोजन करने जा रही है। जबकि टीईटी पास होना सुप्रीम कोर्ट का आदेश और मानव संसाधन विकास मंत्रलय का निर्देश है। अधिवक्ता जीके सिंह, वीके सिंह ने याची नीलेश कुमार सिंह एवं चार अन्य ने स्टेट ऑफ यूपी और वकील अशोक खरे एवं सिद्धार्थ खरे ने आनंद कुमार यादव व दो अन्य की ओर से स्टेट आफ यूपी के तहत याचिका दाखिल की है।


खबर साभार : दैनिक जागरण



58 हजार शिक्षा मित्रों को शिक्षक बनाने की प्रक्रिया आज से



लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन की प्रक्रिया सोमवार से शुरू करेगा। पहले चरण में 58,826 शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक बनाया जाएगा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय परीक्षा पास करने वालों की सूची जिलेवार बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सौंपेंगे। इसके बाद 7 जुलाई तक काउंसलिंग के लिए कार्यक्रम जारी कर दिए जाएंगे।
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 1.70 लाख शिक्षा मित्र बच्चों को पढ़ा रहे हैं। सरकार शिक्षा मित्रों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण देकर परिषदीय स्कूलों में समायोजित करना चाहती है। शिक्षा मित्रों को तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले चरण में 60,000 को प्रशिक्षण दिया गया जिसमें 58,826 ने बीटीसी परीक्षा उत्तीर्ण की है। दूसरे चरण में 64,000 और तीसरे चरण में 46,000 शिक्षा मित्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समायोजन की प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी।
                                                               खबर साभार : अमर उजाला

शिक्षामित्रों के समायोजन पर सरकार से जवाब तलब : हाईकोर्ट ने 19 जून तक पक्ष रखने को कहा

  • हाई कोर्ट ने पूछा, किस आधार पर शिक्षक बनाना चाह रही है सरकार
  • कहा- प्रदेश सरकार व शिक्षामित्र 19 जून तक रखे अपना पक्ष
इलाहाबाद। सूबे में करीब पौने दो लाख शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाने के मामले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा कि वह किस आधार पर शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाना चाह रही है? हाई कोर्ट को दी गई याचिका में शिक्षामित्रों के समायोजन के लिए 7 फरवरी 2014 के शासनादेश पर रोक लगाने, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा (19वां संशोधन) नियमावली 2014 और नि:शुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (प्रथम संशोधन नियमावली) 2014 पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। उधर, शिक्षामित्रों ने भी कोर्ट से इस मामले में उनका पक्ष सुने जाने के लिए अर्जी दी। इस पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार व शिक्षामित्रों से 19 जून तक अपना पक्ष रखने को कहा है।
बीटीसी प्रशिक्षु शिवम राजन ने शिक्षामित्रों के समायोजन को चुनौती देते हुए याचिका में बताया कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने 23 अगस्त 2010 को सहायक अध्यापक के लिए न्यूनतम योग्यता शिक्षक अर्हता के साथ ही टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद मानव संसाधन मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी किया कि अगर किसी राज्य सरकार को एनसीटीई के नियमों में कोई छूट चाहिए तो उसे केंद्र सरकार से अनुरोध करना होगा। लेकिन यूपी सरकार ने केंद्र से अनुमति लिए बिना 14 जनवरी 2011 को एनसीटीई को प्रस्ताव भेजा कि शिक्षामित्रों को बेसिक शिक्षक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एनसीटीई ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
याचिका में यह भी बताया गया है कि शिक्षामित्रों को प्रशिक्षण देने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लंबित है। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पहले प्रशिक्षण पर रोक लगा दी थी, जिसके खिलाफ विशेष अपील हुई। 30 मई 2011 को स्थगन आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुन: निस्तारण के लिए एकलपीठ के समक्ष भेज दिया गया।
साथ ही यह कहा कि शिक्षामित्रों के प्रशिक्षण का मामला एकल पीठ द्वारा याचिका पर दिए अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने 7 फरवरी 2013 को शासनादेश जारी कर शिक्षामित्रों के समायोजन का निर्देश जारी कर दिया। कोर्ट में एनसीटीई के अधिवक्ता रिजवान अजी अख्तर ने भी एनसीटीई का पक्ष रखा।

  • नियमों के मुताबिक समायोजन
शिक्षामित्रों के वकील अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार आरटीई एक्ट 2009 के प्रावधानों और एनसीटीई की अधिसूचना के पैरा-4 के तहत शिक्षा मित्रों का समायोजन कर रही है, जो नियमानुकूल है। 
खबर साभार : अमर उजाला

                                                               साभार : डेली न्यूज एक्टिविस्ट



साभार : हिन्दुस्तान

बंद व एकल स्कूलों में तैनात होंगे शिक्षा मित्र : समायोजन प्रक्रिया जून के अंत तक !

  • समायोजन प्रक्रिया जून के अंत तक पूरी करने की तैयारी
  • पहले चरण में 58,826 शिक्षामित्र होंगे समायोजित
लखनऊ। शिक्षा मित्रों को बंद और एकल स्कूलों में तैनात करने में प्राथमिकता दी जाएगी। उनके समायोजन के संबंध में इसी हफ्ते कार्यक्रम जारी करने की तैयारी है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पर शिक्षा मित्रों के प्रमाण पत्रों का मिलान किया जाएगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित होने वाली चयन समिति के अनुमोदन के बाद नियुक्ति अधिकारी बीएसए तैनाती संबंधी आदेश जारी करेगा। पहले चरण में 58,826 शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया जाएगा।
सरकार के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित करने संबंधी आदेश जारी कर दिया है। बेसिक शिक्षा निदेशालय में इस संबंध में उच्चाधिकारियों की बैठक में तय किया गया है कि शिक्षा मित्रों को बंद और एकल स्कूलों में सहायक अध्यापक बनाया जाएगा। प्रदेश में मौजूदा समय बंद 4879 और 25,923 एकल (एक शिक्षक वाले) स्कूल हैं। बीएसए से एक बार फिर से इन स्कूलों का सर्वे कराया जाएगा, ताकि इसका सत्यापन हो जाए। समायोजन प्रक्रिया जून के आखिरी सप्ताह तक पूरी करने की तैयारी है। 

खबर साभार : अमर उजाला


साभार : हिंदुस्तान


शिक्षामित्र बनेंगे शिक्षक : संशोधित नियमावली के साथ समायोजन संबंधी आदेश शीघ्र

  • पहले चरण में 46 हजार शिक्षामित्र बनेंगे शिक्षक
  • संशोधित नियमावली के साथ समायोजन संबंधी आदेश शीघ्र जारी करने की तैयारी
लखनऊ। राज्य सरकार पहले चरण में 46,000 शिक्षा मित्रों को प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक बनाएगी। इसके लिए संशोधित नियमावली के साथ समायोजन संबंधी आदेश शीघ्र ही जारी करने की तैयारी है। बेसिक शिक्षा विभाग चाहता है कि जून में ही समायोजन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए, ताकि जुलाई में परिषदीय स्कूलों में स्थाई शिक्षक मिल सकें।

बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी की मंजूरी के बाद अब इसे जल्द से जल्द अधिसूचित करने की तैयारी है। पहले चरण में 46,000 शिक्षा मित्र दो वर्षीय बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इसलिए सबसे पहले इन्हें ही सहायक अध्यापक बनाया जाएगा। उधर, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के अध्यक्ष गाजी इमाम आला और आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र शाही ने समायोजन संबंधी नियमावली को बेसिक शिक्षा मंत्री से मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बधाई देने के साथ वादा किया है कि परिषदीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में वे सुधार लाएंगे।

खबर साभार : अमर उजाला

शिक्षा मित्रों के शिक्षक बनने का रास्ता साफ : बेसिक शिक्षामंत्री ने समायोजन फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए

लखनऊ (ब्यूरो)। परिषदीय स्कूलों में कार्यरत 1,72,000 शिक्षा मित्रों के शिक्षक बनने का रास्ता साफ हो गया है। बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने शिक्षा मित्रों के समायोजन संबंधी फाइल पर मंगलवार को हस्ताक्षर कर दिए। जल्द ही इसे गजट नोटीफिकेशन के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद इनके समायोजन संबंधी आदेश जारी कर दिए जाएंगे। समायोजन की प्रक्रिया जून में शुरू करने की विभाग की तैयारी है। गौरतलब है कि समायोजन के लिए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में संशोधन किया जा चुका है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के चलते इस पर निर्णय नहीं हो पाया था।


खबर साभार : अमर उजाला
शिक्षामित्रों के समायोजन की पत्रावली का अनुमोदन
लखनऊ (एसएनबी)। बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोबिंद चौधरी ने समायोजन की बाट जोह रहे शिक्षामित्रों की पत्रावली का मंगलवार को अनुमोदन कर दिया है। अब एक-दो दिनों में शिक्षामित्रों के शिक्षक सहायक पद पर समायोजित करने को लेकर सेवा नियमावली जारी की जा सकती है। पहले चरण में प्रदेश में 59 हजार शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन के लिए प्रक्रिया पूरी की जाएगी और नये शैक्षिक सत्र में उन्हें पूरी तरह शिक्षक के रूप में तैनात किया जा सकता है। 

उधर शिक्षामित्रों के एक गुट ने अब जरा भी देरी होने पर 20 जून को विधानसभा के घेराव का भी एलान कर दिया है। सरकार ने प्रदेश में दस वर्ष से ज्यादा समय से परिषदीय स्कूलों में शिक्षामित्रों के रूप में अध्यापन कर रहे लोगों के नियमितीकरण के लिए लोकसभा चुनाव से पहले फैसला लिया था, लेकिन सेवा नियमावली जारी नहीं हो पायी थी। चुनाव के दौरान शिक्षामित्रों के समायोजन की प्रक्रिया को चालू रखने के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी मांगी गयी, लेकिन मामला अटक गया। 19 मई को चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद से ही शिक्षामित्रों के अलग- अलग गुटों ने शासन में पैरवी शुरू कर दी। बेसिक शिक्षा सचिव नीतिश्वर कुमार ने शिक्षामित्रों की सेवा नियमावली जारी करने से पहले फाइल बेसिक शिक्षा मंत्री के अनुमोदन के लिए भेजी थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पहले ही अनुमोदन मिलने के बाद दोबारा फाइल बेसिक शिक्षा मंत्री को भेजने पर शिक्षामित्रों में आक्रोश पनपने लगा था। मंगलवार को शिक्षामित्रों के समायोजन की फाइल को बेसिक शिक्षा मंत्री से अनुमोदन मिलने के बाद पत्रावली विभाग में आ गयी है। अब पहले से ही तैयार सेवा नियमावली को अब किसी भी दिन जारी किया जा सकता है। 

आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र शाही ने उम्मीद जतायी कि बुधवार को नियमावली जारी हो सकती है। उधर उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र-शिक्षक कल्याण समिति के अध्यक्ष अनिल वर्मा ने चेतावनी दी है कि अब वह शासनादेश का इंतजार नहीं करेंगे, 20 जून को विधानसभा का घेराव करने के लिए जुटेंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शासनादेश जारी कर देगी तो वह अपना निर्णय वापस ले लेंगे।
खबर साभार : राष्ट्रीय सहारा

शिक्षामित्रों की परीक्षा टली : 28 मई को होने वाली परीक्षा अब 2 जून को होगी

  • 29,30 व 31 को होने वाली परीक्षा पूर्व निर्धारित समयानुसार उन्ही केन्द्रों पर होगी
  • 28 मई राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की परीक्षा होने के कारण परीक्षा टली


शिक्षा मित्रों के समायोजन पर सीएम करेंगे निर्णय : 72,825 शिक्षकों की भर्ती में लगेगा वक्त

  • शिक्षा मित्रों के समायोजन पर सीएम करेंगे निर्णय
लखनऊ। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होते ही विभाग अटके नीतिगत मामलों को निस्तारित करने की प्रक्रिया में जुट गए हैं। इसी कड़ी में बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षा मित्रों के समायोजन की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए सोमवार को बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी को फाइल भेज दी है। मुख्यमंत्री से अनुमति मिलने के बाद समायोजन संबंधी आदेश जारी किया जाएगा।
राज्य सरकार बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके शिक्षामित्रों को शिक्षक पद पर समायोजित करना चाहती है। इस संबंध में कैबिनेट का निर्णय हो चुका है। नियमावली जारी की जानी थी, लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते मामला अटक गया। बेसिक शिक्षा विभाग ने चुनाव आयोग से समायोजन के संबंध में अनुमति मांगी थी पर अनुमति नहीं मिल सकी। आचार संहिता समाप्त हो चुकी है इसलिए बेसिक शिक्षा विभाग चाहता है कि अब शिक्षा मित्रों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार ने सोमवार को इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक की और शिक्षा मित्रों के समायोजन संबंधी फाइल बेसिक शिक्षा मंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया।
  • 72,825 शिक्षकों की भर्ती में लगेगा वक्त
बेसिक शिक्षा विभाग ने भले ही 72,825 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन इसमें अभी और समय लगेगा। विभाग ने सुप्रीम कोर्ट से समय मांगने के लिए अर्जी लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट को अब इस पर सुनवाई करनी है। विभाग ने तर्क दिया है कि शिक्षकों की भर्ती के लिए पहला विज्ञापन नवंबर 2011 में निकाला गया था। उस समय ऑनलाइन आवेदन नहीं लिए गए थे। बाद में इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया। इसलिए उस समय आए आवेदनों को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत नहीं किया जा सका था। यही नहीं कुछ आवेदकों ने अपने आवेदन भी वापस ले लिए थे। इससे पुराने विज्ञापन के आधार पर भर्ती के लिए समय लगेगा। बेसिक शिक्षा विभाग सुप्रीम कोर्ट से समय मिलने का इंतजार कर रहा है।
  • बीटीसी की शेष सीटों की काउंसलिंग इसी हफ्ते
लखनऊ(ब्यूरो)। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) बीटीसी की बची 7000 सीटों के लिए काउंसलिंग इसी हफ्ते कराने जा रही है। एससीईआरटी ने सोमवार को एनआईसी को रिक्तियों की सूची भेज दी है। वहां से सूचना मिलने के बाद काउंसलिंग का कार्यक्रम जारी कर दिया जाएगा।
खबर साभार : अमर उजाला

बीटीसी व शिक्षा मित्रों की परीक्षाओं के केंद्र निर्धारित

  • राजकीय इंटर कॉलेजों को बनाया गया परीक्षा केंद्र
  • परीक्षा 26 से 31 मई के बीच होगी

लखनऊ। बीटीसी वर्ष 2010 व 2011 तृतीय सेमेस्टर तथा शिक्षा मित्र व समाज कल्याण विभाग के अप्रशिक्षित शिक्षकों के प्रथम, द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाओं के लिए सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने प्रदेश के 70 जिलों में परीक्षा केंद्र बना दिए हैं। इसके लिए राजकीय इंटर कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। परीक्षा 26 से 31 मई के बीच होगी। राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्यों को ही केंद्र व्यवस्थापक बनाया गया है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी नीना श्रीवास्तव ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया हैं। बीटीसी 2010 व 2011 तृतीय सेमेस्टर प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा 26 मई, द्वितीय व तृतीय प्रश्नपत्र की परीक्षा 27 मई का क्रमश: पहली और दूसरी पाली में कराई जाएगी। पहली पाली 10 से 12 और दूसरी पाली 1 से 3 बजे तक होगी। पत्राचार से बीटीसी प्रशिक्षण ले रहे शिक्षा मित्रों की प्रथम सेमेस्टर में प्रथम व द्वितीय प्रश्नपत्र की 28 मई को क्रमश: पहली 10 से 1 बजे व दूसरी पाली 2 से 5 बजे तक में परीक्षा होगी। द्वितीय सेमेस्टर की प्रथम व द्वितीय प्रश्नपत्र की 29 मई को क्रमश: पहली व दूसरी पाली में होगी। इसी तरह तृतीय सेमेस्टर की प्रथम व द्वितीय प्रश्नपत्र की परीक्षा 30 मई को पहली व दूसरी पाली में तथा चतुर्थ सेमेस्टर की 31 मई को पहली व दूसरी पाली में परीक्षाएं होंगी।
बीटीसी तृतीय सेमेस्टर के प्रथम प्रश्नपत्र में उत्तरपुस्तिका का प्रयोग होगा। प्रथम प्रश्नपत्र दीर्घ उत्तरीय, लघु उत्तरीय, अति लघु उत्तरीय व बहुविकल्पीय होंगे। द्वितीय व तृतीय प्रश्नपत्र बहुविकल्पीय होंगे। प्रथम प्रश्नपत्र 80 अंक, द्वितीय तथा तृतीय प्रश्नपत्र 160-160 अंकों के होंगे। केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देश दिया गया है कि वे परीक्षा संबंधी सभी तैयारियां समय से पहले पूरी करा लें, ताकि किसी तरह का कोई व्यवधान न आए।


खबर साभार : अमर उजाला



शिक्षा मित्रों के समायोजन का शासनादेश शीघ्र

सुस्त पड़ी योजनाओं में आयेगी तेजी
घोषित होगी टीईटी 2013 की मेरिट
निदेशक पद पर नियमित चयन व डीपीसी की राह होगी आसान
शिक्षा मित्रों के समायोजन का शासनादेश शीघ्र

लखनऊ। प्रदेश में शिक्षा विभाग को अपनी योजनाओं पर अमल करने के लिए चुनाव आचार संहिता के खत्म होने का बेसब्री से इंतजार है। तकरीबन ढाई माह से चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने से महकमे की रफ्तार सुस्त हो गयी थी। परन्तु इसके बाद टीईटी 2013 की मेरिट जारी करने, शिक्षा मित्रों को शिक्षक सहायक पदों पर भर्ती, परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती जैसी कई योजनाओं को गति देने में मदद मिलेगी। 

इसके साथ ही प्रदेश में अपर निदेशक से निदेशक पद के लिए होने वाली विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) भी नहीं हो पा रही थी। इतना ही नहीं बेसिक शिक्षा परिषद के निदेशक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के निदेशक पद पर चयन का मामला भी लम्बित चल रहा है। चुनाव आचार संहिता के चलते ही बेसिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक पद पर वासुदेव यादव को सेवा विस्तार

नहीं मिल सका और उन्हें आयोग की मंजूरी के पेंच से रिटायर कर दिया गया। 

सूत्रों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता खत्म होने के कुछ दिनों के भीतर ही टीईटी की मेरिट घोषित कर दी जाएगी। इसके बाद शिक्षक भर्ती को रफ्तार मिल सकेगी। इस टीईटी के बाद प्रदेश में एक बार फिर शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया का आगाज होगा ताकि प्रदेश में नये शैक्षिक सत्र से शिक्षक नियुक्त किये जा सके। उल्लेखनीय है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान शिक्षा विभाग ने दो मामलों में चुनाव आयोग से मंजूरी मांगी थी। इनमें शिक्षा निदेशक पद पर वासुदेव यादव को सेवा विस्तार व शिक्षामित्रों के अध्यापक पदों पर भर्ती का शासनादेश जारी करना लेकिन दोनों ही मामलों में विभाग को आयोग से ग्रीन सिग्नल नहीं मिल पाया था। अब चुनाव खत्म होने के बाद आचार संहिता समाप्त हो जाएगी। इसके बाद विभाग को अपना काम करने में तेजी लाने की छूट मिल जाएगी।
खबर साभार :राष्ट्रीय सहारा

शिक्षामित्रों, शिक्षकों व संविदा कर्मियों के मानदेय पर संकट : आचार संहिता के फेर में फंसा SSA का बजट

  • शिक्षामित्रों, शिक्षकों व संविदा कर्मियों के मानदेय पर संकट
  • आचार संहिता के फेर में फंसा सर्व शिक्षा अभियान का बजट
  • राज्य सरकार को केंद्र में नई सरकार के गठन का करना होगा इंतजार

लखनऊ। चुनावी आचार संहिता के फेर में सर्व शिक्षा अभियान का बजट भी फंस गया है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद ही बजट रिलीज किया जाएगा। राज्य सरकार को अब केंद्र में नई सरकार के गठन का इंतजार करना होगा। इसके बाद ही बजट मिल पाएगा। इससे संविदा पर कार्यरत शिक्षामित्रों, विशेषज्ञ शिक्षकों और ब्लाॅकों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर और सहायक लेखाकारों के मानदेय का संकट खड़ा हो गया है।
राज्य सरकार ने इस बार सर्व शिक्षा अभियान के तहत 13477.82 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था। इसमें मानसिक मंदित, जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) बुखार वाले 5256 बच्चों को घर पर शिक्षा देने, 1546 प्राथमिक, 198 उच्च प्राथमिक स्कूल खोलने, परिषदीय स्कूलों में 6445 अतिरिक्त क्लास रूम, 71,728 स्कूलों में चाहरदीवारी बनाने, 3257 में पेयजल की सुविधा तथा 2047 छात्रों के व 1271 बालिकाओं के स्कूलों के लिए शौचालय बनाने का प्रावधान किया गया है। 
मानव संसाधन विकास मंत्रालय राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बजट पर चर्चा भी कर चुका है। कुछ प्रस्तावों को छोड़ दें तो अधिकतर पर सहमति बन चुकी है। केंद्र सर्व शिक्षा अभियान के तहत बजट जारी करता इससे पहले आचार संहिता लागू हो गई। राज्य सरकार ने कुछ जरूरी मदों में पैसे देने की मांग भी की थी। मसलन संविदा पर कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों और ब्लाॅकों पर कार्यरत लेखाकार और कंप्यूटर ऑपरेटरों का मानदेय का पैसा मांगा गया था, लेकिन इसे भी अभी तक नहीं दिया गया है।


खबर साभार : अमर उजाला

शिक्षा मित्रों की परीक्षाएं 21 मई से


शिक्षा मित्रों की परीक्षाएं 21 से 30 मई तक होंगी। इस संबंध में सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने आदेश जारी कर दिया है। प्रदेश में 163 स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को केंद्र व्यवस्थापक बनाते हुए उन्हें परीक्षा संबंधी तैयारियां करने का निर्देश दिया गया है। 
 
प्रदेश में करीब 1.72 लाख शिक्षा मित्रों को दो वर्षीय पत्राचार बीटीसी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। परीक्षा के लिए संबंधित केंद्रों पर सामग्री समय से उपलब्ध करा दी जाएगी। केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देश दिया गया है कि परीक्षा की तैयारियां समय रहते पूरी करा ली जाएं। जिससे किसी तरह की परेशानी न हो। 
 

सभी परिषदीय स्कूलों में लागू होगा सीसीई : सभी जिलों में शुरू करने की तैयारी

  • सभी परिषदीय स्कूलों में लागू होगा सीसीई
  • पढ़ाई के साथ हर पहलू पर नजर
  • मॉड्यूल में करना होगा परिवर्तन
  • नए शैक्षिक सत्र से प्रदेश के सभी जिलों में शुरू करने की तैयारी

अब नए शैक्षिक सत्र से बेसिक शिक्षा परिषद के सभी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विालयों में पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के व्यक्त्वि के विकास पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए परिषदीय विालयों में बच्चों का सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (सीसीई) शुरू करने की तैयारी है। हर तीन महीने में उनके मूल्यांकन के आधार पर ग्रेड दिए जाने पर भी विचार किया जा रहा है।

दरअसल, प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 27 जुलाई 2011 को लागू किया गया था। जिसमें बच्चों के मूल्यांकन पर खास जोर दिया गया है। इस व्यवस्था के बाद सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के पांच जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत सीसीई लागू किया गया था। इनमें बलरामपुर, रायबरेली, वाराणसी, ललितपुर और गाजियाबाद के पांच-पांच स्कूल शामिल थे। इस व्यवस्था में भी नगर और ग्रामीण क्षेत्र के एक-एक प्राइमरी व जूनियर विालय को लिया गया।

बच्चे को पढ़ाई के साथ-साथ किस खेल में रुचि है या फिर वह कला संगीत के क्षेत्र में कुछ करने की क्षमता रखता है, सीसीई के तहत इस पर भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। बच्चों को बकायदा प्रोजेक्ट वर्क भी दिया जाएगा जिसे उन्हें बनाना होगा। इन सबके आधार पर ग्रेडिंग दी जाएगी। वहीं शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर पढ़ाई के तौर तरीके भी सिखाए जाएंगे। हर महीने अभिभावकों को बुलाकर बच्चों की यथास्थिति से भी अवगत कराया जाएगा।

अभी तक जिन जिलों में सीसीई लागू है वहां पर मूल्यांकन के बाद बच्चों को ग्रेडिंग नहीं दी जाती है। लेकिन प्रदेश के सभी जिलों में इसे लागू करने के लिए विचार किया जा रहा है कि बच्चों को ग्रेडिंग दी जाए, जिससे उनमें उत्साह बना रहे। एससीईआरटी इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। जानकारों की मानें तो मॉड्यूल में परिवर्तन के लिए एससीईआरटी एनसीईआरटी, एडसिल व एमएसआरडी का टेक्निकल सपोर्ट लेगा।

खबर साभार : डेली न्यूज एक्टिविस्ट

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