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राज्य कर्मचारियों को दीपावली के पहले सात प्रतिशत बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता व एक महीने का बोनस मिल सकता है। प्रदेश के वित्त विभाग ने इससे जुड़ी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
प्रदेश सरकार केंद्र के निर्णय के अनुसार सूबे में कार्यरत केंद्रीय सेवा के अफसरों को बढ़ा महंगाई भत्ता देने का आदेश पहले ही कर चुकी है। इस समय पेंशनरों व राज्य कर्मियों को महंगाई भत्ता देने संबंधी प्रस्ताव पर कार्रवाई चल रही है।
सूत्रों के अनुसार जुलाई से सितंबर तक का बढ़ा हुआ सात प्रतिशत डीए जीपीएफ में जमा किया जा सकता है। कर्मचारी 100 प्रतिशत डीए पहले से पा रहे हैं। इस तरह 107 फीसदी डीए अक्तूबर के वेतन के साथ जुड़कर नकद मिल सकता है। वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्र ने अपने कर्मचारियों के लिए बोनस का भी ऐलान कर दिया है। प्रदेश में भी एक महीने का बोनस अधिकतम 3500 रुपये की सीमा में दिया जाता रहा है। वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार दीपावली के पहले बोनस भी दिया जा सकता है।
खबर साभार : अमर उजाला
- 15 साल की न्यायिक लड़ाई के बाद मिला 75 वर्षीय महिला को इंसाफ
- पारिवारिक पेंशन के साथ तीन सप्ताह में उसका अवशेष बकाया देने का आदेश
लखनऊ : उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सरकारी कर्मचारियों को दी जाने वाली पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन पर अहम फैसला देते हुए कहा है कि पेंशन कर्मचारी का कानूनी अधिकार है।
अदालत ने कहा कि कर्मचारी की पेंशन छोटे-मोटे कारणों को लेकर नहीं रोकी जानी चाहिए। इस टिप्पणी के साथ ही पीठ ने विधवा वृद्धा को पारिवारिक पेंशन तत्काल दिए जाने का फैसला सुनाया। पंद्रह साल तक कानूनी लड़ाई के बाद 75 वर्ष की राम प्यारी को मिला न्याय। न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार त्रिपाठी की खंडपीठ ने यह आदेश विशेष अपील को खारिज करते हुए दिये हैं।
विदित हो कि राम प्यारी देवी के पति पूर्वीदीन मोहान के एक स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। पूर्वीदीन की मृत्यु वर्ष 1999 में हो गई थी। इसके बाद विधवा ने उप शिक्षा निदेशक माध्यमिक से परिवारिक पेंशन की मांग की। रामप्यारी देवी का आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि पारिवारिक पेंशन के मामले में वर्ष 1989 में शासनादेश है। इस आदेश को रामप्यारी देवी ने एकल न्यायाधीश के समक्ष चुनौती दी। एकल न्यायाधीश ने याचिका स्वीकार करते हुए वर्ष 2002 में आदेश दिया कि रामप्यारी देवी पारिवारिक पेंशन की हकदार है।
इस आदेश में शिक्षा विभाग व सरकार ने विशेष अपील दायर कर चुनौती दी। पीठ ने विशेष अपील खारिज करते हुए कहा कि कर्मचारी की विधवा पारिवारिक पेंशन की पूरी हकदार है। अदालत ने कहा कि कर्मचारी साठ वर्ष तक सेवा करता है। इसके बाद उसका विधिक अधिकार बनता है कि उसे पेंशन अथवा पारिवारिक पेंशन दी जाए। पीठ ने कहा कि रामप्यारी देवी को दो सप्ताह में आदेश से अवगत कराया जाए तथा पारिवारिक पेंशन के साथ तीन सप्ताह में उसका अवशेष बकाया सभी दिया जाए।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ व विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 21 अगस्त को बेसिक शिक्षा निदेशालय पर धरना देने का फैसला किया है। इसमें प्रदेश भर के शिक्षक एकत्र होंगे। एसोसिएशन की वरिष्ठ उपाध्यक्ष शालिनी मिश्रा ने बताया कि विशिष्ट बीटीसी 2004 बैच को पुरानी पेंशन के लिए हाईकोर्ट 2012 में ही आदेश कर चुका है। इसके बावजूद सरकारी उदासीनता की वजह से 40 हजार शिक्षक पुरानी पेंशन का लाभ नहीं पा रहे हैं।
खबर साभार : अमर उजाला
खबर साभार : हिंदुस्तान
लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती के लिए आवेदन में सुधार के लिए प्रत्यावेदन अब 21 जुलाई तक भेजे जा सकेंगे। पहले इसे भेजने की अंतिम तिथि 15 जुलाई थी। प्रदेश में अब तक करीब 60 लाख आवेदकों ने अपने ऑनलाइन विवरण डाउनलोड किए हैं। इसके आधार पर संशोधन के लिए जिलेवार प्रत्यावेदन भेजे जा रहे हैं। ऐसे में प्रत्यावेदन भेजने के लिए डाकघरों में अभ्यर्थियों की भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में डाक विभाग ने शासन से तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था, जिसे मानते हुए प्रत्यावेदन भेजने की अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्णय किया गया। प्रत्यावेदन अब 21 जुलाई की शाम 5 बजे तक संबंधित जिले के डायटों पर भेजे जा सकते हैं। प्रत्यावेदन देने के लिए समय सीमा तीसरी बार बढ़ाई गई है। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने बताया कि जिलेवार संशोधन का प्रत्यावेदन मिलने के बाद अंतिम मेरिट निकालने के साथ ही काउंसलिंग का संशोधित कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
विभागीय जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर में करीब 68 लाख आवेदन शिक्षक भर्ती के लिए आए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने
http://upbasiceduboard.gov.in,
http://164.100.181.130,
http://164.100.181.234 तथा
http://164.100.181.141 पर पूरा ब्यौरा ऑनलाइन किया है। आवेदक ऑनलाइन ब्यौरा देखकर गलतियों को सुधारने के लिए प्रत्यावेदन दे सकते हैं। सचिव बेसिक शिक्षा ने कहा है कि प्रत्यावेदन देने के लिए आवेदकों को पूरा मौका इसलिए दिया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित न रह जाए।
- निदेशक से लेकर एसडीआई तक जाएंगे स्कूल
- शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता जरूरी : आलोक रंजन
लखनऊ। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा में सुधार लाने के लिए निदेशक से लेकर खंड शिक्षा अधिकारी तक स्कूलों का मासिक निरीक्षण करेंगे। परिषदीय स्कूलों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सोमवार को बैठक में यह निर्देश अधिकारियों को दिए।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था के लिए हैंडपंपों लगवाए जाएं। सर्वशिक्षा अभियान में प्राथमिक के 96,46,353 तथा उच्च प्राथमिक के 41,85,590, राज्य योजना से प्राथमिक के 46,08,251 और उच्च प्राथमिक के 19,70,236 छात्र-छात्राओं को मुफ्त किताबें माह के अंत तक बांट दी जाएंगी। परिषदीय स्कूलों में सतत मूल्यांकन के लिए शिक्षकों को अक्तूबर तक प्रशिक्षण दे दिया जाए जिससे इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षिकाओं को विज्ञान और गणित का प्रशिक्षण अगस्त में दिलाया जाए। मिड-डे-मील योजना को और प्रभावी बनाने के लिए हेल्पलाइन सेवा टोल फ्री नंबर 18004190102 की सुविधा का प्रभावी बनाया जाए। हाउस होल्ड सर्वे प्रभावी ढंग से कराते हुए स्कूलों में दाखिला बढ़ाया जाए।
- नियमों को दरकिनार कर लाभ देने का आरोप
- नौ जुलाई को हाई कोर्ट करेगा याचिका पर सुनवाई
बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों के समायोजन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। बीटीसी संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश एवं टेट मोर्चा उत्तर प्रदेश ने इस संबंध में याचिका दायर की है।1 आरोप है कि प्रदेश सरकार नियमों की अनदेखी करके शिक्षामित्रों को लाभ देने पर उतारू है। इसमें उच्चतम न्यायालय के फरमान एवं मानव संसाधन विकास मंत्रलय के निर्देशों की अनदेखी हो रही है। प्रकरण की सुनवाई नौ जुलाई को होगी। प्रदेश में 2001-02 में संविदा के आधार पर शिक्षामित्रों को नियुक्ति मिली थी। अधिकांश शिक्षामित्र हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट पास थे। इसमें आरक्षण प्रक्रिया लागू नहीं हुई थी।
सरकार ने शिक्षामित्रों को स्नातक कराने के लिए अनुमति ली और दूरस्थ शिक्षा के तहत कई ने स्नातक किया, वहीं करीब आधे से अधिक शिक्षामित्रों ने नियमों को ताक पर रखकर कॉलेजों में रेगुलर स्नातक किया। बीटीसी संघर्ष समिति के एहतेशाम ने बताया कि इन विसंगतियों को लेकर संतोष कुमार मिश्र ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। प्रकरण में निर्णय सुरक्षित रखा गया है। इसके बाद भी प्रदेश सरकार टीईटी के बिना समायोजन करने जा रही है। जबकि टीईटी पास होना सुप्रीम कोर्ट का आदेश और मानव संसाधन विकास मंत्रलय का निर्देश है। अधिवक्ता जीके सिंह, वीके सिंह ने याची नीलेश कुमार सिंह एवं चार अन्य ने स्टेट ऑफ यूपी और वकील अशोक खरे एवं सिद्धार्थ खरे ने आनंद कुमार यादव व दो अन्य की ओर से स्टेट आफ यूपी के तहत याचिका दाखिल की है।

खबर साभार : दैनिक जागरण
सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद ‘स्कूल चलो अभियान’ में सफलता नहीं मिलने को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने शुक्रवार को सभी सांसदों, विधान सभा, विधान परिषद सदस्यों और जिला एवं नगर पंचायत अध्यक्षों को पत्र लिखकर कर अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया है।
मुख्यमंत्री ने माननीयों को लिखे पत्र में कहा है कि हम सभी का यह नैतिक दायित्व है कि प्रत्येक बच्चे को प्रारम्भिक शिक्षा सुलभ कराई जाए। संविधान द्वारा छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को प्रदत्त नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा (आरटीई) के अधिकार का पालन कराने के लिए सरकार कृत संकल्प है। प्रत्येक बच्चे को विद्यालय परिधि में अनिवार्य रूप से लाने और आयुसंगत कक्षा में प्रवेश दिलाकर शिक्षा दिलाना हमारी प्राथमिकता है।
अखिलेश ने पत्र में लिखा है कि पहली जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। बालक-बालिकाओं का नामांकन कराने एवं पूरे वर्ष उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से ‘स्कूल चलो अभियान’ संचालित किया जाएगा। घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि विद्यालयांे में समस्त बच्चों को प्रवेश मिल जाए। सीएम ने सभी प्राथमिक/उच्च प्राथमिक, परिषदीय विद्यालयों की प्रबन्ध समिति के अध्यक्षों को लिखे एक अन्य पत्र में इन बातों के अतिरिक्त लिखा है कि प्राथमिक स्कूलों को सुदृढ़ कर उन्हें ऐसा बनाया जाए, कि बच्चे निकटतम स्कूल में शिक्षा अच्छी शिक्षा प्राप्त करें।
खबर साभार : दैनिक जागरण
यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के सभी सांसदों, विधान सभा-विधान परिषद सदस्यों, जिला एवं नगर पंचायत अध्यक्षों को भेजे गए एक पत्र में स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हम सभी का यह नैतिक दायित्व है कि प्रत्येक बच्चे को प्रारंभिक शिक्षा सुलभ कराई जाए। संविधान द्वारा छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को प्रदत्त नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का पालन कराने के लिए राज्य सरकार कृत संकल्प है। इसके साथ ही छह से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को विालय परिधि में अनिवार्य रूप से लाने और उन्हें आयु संगत कक्षा में प्रवेश दिलाकर शिक्षा दिलाना हमारी प्राथमिकता है। श्री यादव ने पत्र में लिखा है कि नवीन शैक्षिक सत्र पहली जुलाई से प्रारंभ हो गया है। बालक-बालिकाओं का नामांकन कराने एवं पूरे वर्ष उन्हें नियमित रूप से विालय भेजने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पहले जुलाई से 31 जुलाई तक प्रदेश में स्कूल चलो अभियान संचालित किया जाएगा। राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है कि छह से 14 आयु वर्ग के सभी बच्चे विालयों में हों। प्रदेश सरकार संकल्पबद्ध है कि बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें तथा अन्य सुविधाएं समय से उपलब्ध हों, साथ ही उन्हंे गुणवत्ता युक्त दोपहर का भोजन नियमित रूप से मिले।
मुख्यमंत्री ने यह भी लिखा है शिक्षा से न केवल बौद्धिक विकास होता है अपितु रूढ़िवादिता एवं अंधविश्वास से मुक्त एक बेहतर समाज का निर्माण होता है। श्री यादव ने जनप्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि समाज के सभी वर्गो विशेष रूप से अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, जनजाति, गरीब व वंचित, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग के सभी बच्चों को विालय लाने में अपना योगदान एवं नेतृत्व प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने यह भी आग्रह किया कि छात्रों एवं अध्यापकों की उपस्थिति, गुणवत्तायुक्त शिक्षा एवं ठहराव के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दें।
मुख्यमंत्री ने सभी प्राथमिक-उच्च प्राथमिक, परिषदीय विालयों की प्रबंध समिति के अध्यक्षों को लिखे एक अन्य पत्र में इन बातों के अतिरिक्त लिखा है कि प्राथमिक स्कूलों को सुदृढ़ कर उन्हें ऐसा बनाया जाए जिससे कि अच्छे स्कूल की तलाश में बच्चे दूर न जाकर निकटतम स्कूल में शिक्षा प्राप्त करें। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा को उच्च शिक्षा की नींव बताते हुए कहा है कि इसकी सुव्यवस्था प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है।
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| खबर साभार : : डेली न्यूज एक्टिविस्ट |
- शिक्षक नहीं पाएंगे मनचाहे जिलों में तबादला
- निदेशालय ने स्थानांतरण नीति का भेजा प्रस्ताव
- शिक्षकों की भर्ती जारी रहने के कारण किया निर्णय
- इस वर्ष नहीं होगा जिलास्तरीय समायोजन
लखनऊ। परिषदीय स्कूलों के शिक्षक इस साल मनचाहे जिलों में तबादला नहीं पाएंगे। बेसिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में स्थानांतरण नीति संबंधी प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा समय चार स्तरों पर शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जो 31 अगस्त तक पूरी होगी। इसके बाद ही जिलेवार शिक्षकों के रिक्त पदों के बारे में वास्तविक जानकारी मिल सकेगी। इसलिए शिक्षकों के अंतरजनपदीय स्थानांतरण की कार्यवाही स्थगित रखना उचित होगा। बेसिक शिक्षा निदेशक ने इसके अलावा जिले स्तर पर शिक्षकों के समायोजन और पदोन्नति संबंधी नीति का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इस संबंध में शीघ्र ही शासनादेश जारी किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा निदेशक ने शासन को भेजे प्रस्ताव में कहा है कि परिषदीय शिक्षकों का काडर जिला स्तर का है तथा अंतरजनपदीय स्थानांतरण वार्षिक व्यवस्था के तहत जरूरी नहीं है। यह केवल शिक्षकों को सुविधा देने के लिए है। इसलिए बहुत जरूरी होने पर ही बीएसए की सिफारिश पर शिक्षकों को अंतरजनपदीय स्थानांतरण देना उचित होगा।
परिषदीय स्कूलों में हर साल शिक्षकों का होने वाला समायोजन भी इस साल नहीं किया जाएगा। शासन को भेजे गए प्रस्ताव के मुताबिक मौजूदा समय चार स्तरों पर शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। कमी वाले स्कूलों में डेढ़ माह के अंदर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न हो जाएगी। ऐसे में शिक्षकों के समायोजन की जरूरत नहीं पड़ेगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी केवल उन्हीं स्कूलों के शिक्षकों के समायोजन का प्रस्ताव सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को भेज सकेंगे जहां स्वीकृत संख्या से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। सचिव के अनुमोदन के बाद ऐसे शिक्षकों का समायोजन जरूरत वाले स्कूलों में किया जाएगा।
परिषदीय स्कूलों के खुलते ही पढ़ाई से पहले प्रमोशन का जिन्न निकल आया है। शिक्षा निदेशालय में आ रही सूचनाएं काफी चौंकाने वाली हैं। प्रदेश के कुछ जिलों में तो बीएसए जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों की प्रमोशन सूची बनवा रहे हैं जबकि कई जनपदों में कोर्ट के स्थगनादेश का पालन हो रहा है। कुल मिलाकर ऊहापोह की स्थिति है। अद्यतन जानकारी न होने के कारण बीएसए इस संबंध में शिक्षा निदेशालय से दिशा-निर्देश मांग रहे हैं।
जूनियर हाईस्कूल में अध्यापन कर रहे शिक्षकों का बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त होने का सिलसिला मौजूदा शैक्षिक सत्र में भी जारी रहेगा, क्योंकि अभी प्रमोशन पर कोर्ट का स्थगनादेश बरकरार है। ताज्जुब यह है कि यह आदेश बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ ही शिक्षक संगठनों को भी पता नहीं है। इसीलिए प्रमोशन की प्रक्रिया प्रदेश के कुछ जिलों में शुरू है तो कुछ बेसिक शिक्षाधिकारी निदेशालय से दिशा-निर्देश मांग रहे हैं जबकि शिक्षक संगठनों के लोग प्रमोशन के लिए अफसरों की परिक्रमा में जुटे हैं।
वैसे प्रमोशन की प्रक्रिया भी जनपदों में अलग-अलग है, कुछ जिलों में तो शिक्षक सेवाकाल में तीन-तीन प्रमोशन पा गए तो कहीं पूरी सेवा केवल एक ही प्रमोशन पाकर ही खत्म हो गई। ताजा प्रकरण रायबरेली जनपद से जुड़ा है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ लखनऊ मंडल के अध्यक्ष भगवती सिंह, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष के प्रतिनिधि समर सिंह, ब्लाक अध्यक्ष राघवेंद्र यादव, अजय प्रताप सिंह, मनोज सिंह राठौर, धीरज कुमार व राजेश कुशवाहा गुरुवार को शिक्षा निदेशालय पहुंचे। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बीएसए रायबरेली संदीप चौधरी का पत्र दिखाते हुए जानना चाहा कि आखिर जूनियर शिक्षकों के प्रमोशन में क्या बाधा है।
शिक्षक नेताओं ने यह तर्क दिया कि रायबरेली में 2004 से इस वर्ग का प्रमोशन नहीं हुआ है। 2013 में सूची बन रही थी, तभी कोर्ट का स्थगनादेश होने से प्रक्रिया रोक दी गई। शिक्षक नेताओं ने कहा कि उन्नाव जनपद में बीएसए शिक्षकों का प्रमोशन कराने जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के उप सचिव स्कंद शुक्ल ने कहा कि जूनियर शिक्षकों के प्रमोशन पर अभी कोर्ट की रोक कायम है।
खबर साभार : दैनिक जागरण
- शिक्षक पढ़ाने में नहीं ले रहे रुचि : चौधरी
- ढाई साल में नहीं बदला बेसिक शिक्षा के प्रति लोगों का नजरिया
- केंद्र सरकार पर साधा निशाना
- केवल जीपीएफ का चेक देकर टरकाया
लखनऊ। बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने बेसिक शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की जो भी समस्याएं थीं उसमें अधिकतर का निस्तारण कर दिया गया है। इसके बावजूद शिक्षक शिक्षण कार्य में रुचि नहीं लेते दिख रहे हैं। बेसिक शिक्षा के प्रति सबका नजरिया देखने व सुनने को मिल रहा है। कहा जा रहा है कि हमारे स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो रही। बच्चों की संख्या भी सवा लाख घट गई है। इसलिए जरूरी है कि शिक्षक शिक्षार्थी संकल्प लेकर अपने कार्य में तत्परता से लगें तभी बेसिक शिक्षा अपना अच्छा स्थान बना सकता है। श्री चौधरी सोमवार को सेवानिवृत्त होने वाले परिषदीय विालयों के शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।
इंदिरा नगर स्थित रानी लक्ष्मी बाई मेमोरियल स्कूल में आयोजित सम्मान समारोह में बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब आप जा रहे हैं इसका दुख है। लेकिन सेवानिवृत्त तो एक आयु सीमा है जब तक सिखाने की क्षमता है आप गुरु हैं। इसलिए आपसे आग्रह है कि जिस स्कूल से आप रिटायर हुए हैं उस स्कूल में 15 दिन या सप्ताह में एक बार जरूर जाएं और अपने अनुभव नए शिक्षकों को दें। यह एक समाजिक कार्य होगा। साथ ही सेवानिवृत्त न समझ कर शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा dोत बने रहेंगे। इससे कार्यरत गुरुजनों को भी प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि दिन पर दिन घट रही संख्या पर सचिव बेसिक शिक्षा ने जानकारी दी तो कष्ट हुआ। मुझे तो विश्वास था कि नई सरकार में अच्छी पढ़ाई होगी। प्राइवेट स्कूल के बच्चे भी हमारे यहां पढ़ने आएंगे। लेकिन नतीजा सबके सामने है। इसलिए निर्देश दे रहा हूं कि छात्र संख्या बढ़ाने और गुणवत्ता पूर्वक पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाए। ताकि विधान सभा में कटाक्ष करने वालों पर ताला लग सके। इस अवसर पर बेसिक शिक्षा निदेशक डीबी शर्मा एवं डायट प्राचार्या ललिता प्रदीप ने भी अपने विचार रखे।
बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने भले ही मंच पर अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षकों के सभी देयकों का भुगतान होने की घोषणा की हो। लेकिन सेवानिवृत्त शिक्षकों को देयकों में केवल जीपीएफ के पैसे की ही चेक देकर टरका दिया गया। बीमा व बिक्री पेंशन आदि का भुगतान अभी नहीं किया गया और न ही इन शिक्षकों को कोई जानकारी दी गई।
जूनियर हाईस्कूल लाहौरगंज डालीगंज से सेवानिवृत्त होने वाले साजिद हुसैन, जूनियर सदरौना सरोजिनीनगर से सेवानिवृत्त देवी प्रसाद शर्मा, कन्या उच्च प्राथमिक विालय से सेवानिवृत्त सम्पूर्णा देवी शुक्ल, प्राथमिक विालय अहमद खेड़ा से सेवानिवृत्त शिव बहादुर सिंह सहित किसी भी शिक्षक को जीपीएफ के अलावा कोई देयक नहीं दिया गया। शिक्षकों का कहना था कि जब मंच पर सभी देयकों के दिए जाने की घोषणा कर दी गई तो बीमा और बिक्री पेंशन की धनराशि क्यों नहीं जारी की गई। हालांकि वित्त एवं लेखाधिकारी रामकृष्ण अवस्थी का कहना है कि बीमा के लिए डेढ़ महीने पहले ही पत्रावली इलाहाबाद स्थित एलआईसी दफ्तर भेज दी गई लेकिन अभी स्वीकृति नहीं आई है।
सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान समारोह में बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस माडर्न युग में भी हमारे बच्चे जमीन पर बैठते हैं। टीचर भी टूटी कुर्सियों पर बैठते हैं। हमने शिक्षा सलाहकार समिति की बैठक में बच्चों के लिए कुर्सी मेज, टाई, मोजा व जूते की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा था। लेकिन केंद्र सरकार ने मना कर दिया।
145 शिक्षक हुए सेवानिवृत्त
सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह में बेसिक शिक्षा परिषद के 145 शिक्षक सेवानिवृत्त हुए। इनमें 82 प्रधान अध्यापक व 63 सहायक अध्यापक शामिल हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री ने 20 शिक्षक-शिक्षिकाओं को धार्मिक पुस्तक व जीपीएफ का चेक देकर सम्मानित किया। चूंकि उन्हें विधान सभा सत्र में जाना था, इसलिए शेष को एडी बेसिक व बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सम्मानित किया। इस अवसर पर 145 में से 128 शिक्षकों को जीपीएफ की चेक वितरित कर दी गई। शेष अनुपस्थित रहे।
नहीं मिला चेक
आरएलबी स्कूल के सभागार में सैकड़ों शिक्षकों के बीच 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाली एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी भी चेक लेने के लिए उपस्थित थीं। लेकिन उन्हें मंच पर नहीं बुलाया गया। दरअसल, सलेमपुर पतौरा स्कूल से सोमवार को सेवानिवृत्त हुईं चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मी राम दुलारी भी चेक केलिए आई थीं। लेकिन उन्हें बिना चेक ही बैरंग लौटना पड़ा। बताया गया कि उनकी चेक कल मिलेगी।
खबर साभार : डेली न्यूज एक्टिविस्ट
इलाहाबाद | अब प्राथमिक व उच्च प्राथमिक शिक्षकों को भी अपनी पढ़ाई के लिए छुट्टी मिल सकेगी। जिससे वह वह अपनी योग्यता बढ़ाने के साथ ही पीएचडी, इंजीनियरिंग आदि की डिग्री हासिल कर सकेंगे। यह अवकाश सेवाकाल में अधिकतम दो साल का होगा। ‘शैक्षिक योग्यता संर्वधन’ नामक यह सुविधा इसी सत्र से शुरू हो रही है।
प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के पास टेक्निकल डिग्रियों का अभाव रहता है। नौकरी मिलने के बाद वह बच्चों को तो पढ़ाते हैं परंतु खुद नहीं पढ़ते। इससे सामाजिक व शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलाव से वह परिचित नहीं हो पाते। इसका विपरीत प्रभाव बच्चों के ऊपर पड़ता है। उन्हें सिर्फ किताबी ज्ञान ही मिल पाता है। इसी लिए बेसिक शिक्षा परिषद ने शिक्षकों को पढ़ाई का अवसर देने का निर्णय लिया है। अगर कोई शिक्षक आगे की पढ़ाई करना चाहता है तो उसे दो साल का अवकाश मिल जाएगा। हां इस दौरान उसे वेतन नहीं मिलेगा। बेसिक शिक्षा सचिव संजय सिन्हा के अनुसार शैक्षिक योग्यता संर्वधन’ के माध्यम से शिक्षकों को अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अगर शिक्षक ज्यादा पढ़े-लिखे होंगे तो बच्चों पर उसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
पढ़ाई के लिए आवेदन करने वाले शिक्षक को एक फार्म भरना होगा। इसमें यह जानकारी देनी होगी कि कौन सा कोर्स है, उसे पूरा करने में कितना समय लगेगा। इसके बाद अपने प्रधानाचार्य के माध्यम से बेसिक शिक्षा अधिकारी को फार्म भेजना होगा। वहां से कोर्स के हिसाब से अवैतनिक अवकाश स्वीकृत कर दिया जाएगा।
विकल्प के आधार पर 17140 व 18150 के वेतनमान लगने के संबंध मे आपकी आवश्यकताओं के अनुसार आपके समक्ष प्रस्तुत हैं-
जिन शिक्षकों को इस संबंध मे विकल्प देना है वह अपने जिले के संबन्धित वित्त एवं लेखाधिकारी महोदय को अपने खंड शिक्षा अधिकारी महोदय के माध्यम से दो पत्रक 7 जुलाई तक देंगे और प्राप्ति रसीद प्राप्त करेंगे।
1- विकल्प पत्र और सहमति (अंडरटेकिंग) पत्र और
2- खंड शिक्षा अधिकारी को संबोधित प्रत्यावेदन
दोनों पत्रक उदाहरण सहित नीचे इमेज रूपमे दिये गए हैं यदि आप चाहें तो नीचे दिये गए वर्ड / पीडीएफ फाइल के लिंक को क्लिक करके भी प्रिंट करा सकते हैं। यह पत्रक मार्गदर्शक रूप मे हैं। किसी भी रूप मे यह प्रारूप बाध्यकारी नहीं है। लेकिन यह विकल्प आपको 7 जुलाई के पहले देना अवश्य है। अपने जिले के संघीय नेताओं और अपने साथियों के संपर्क मे रहिए। और जैसा जो कुछ आपके जिले मे चल रहा हो वैसा करें।
1- विकल्प पत्र और सहमति (अंडरटेकिंग) पत्र
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| उदाहरण विकल्प पत्रक और सहमति पत्रक : साभार टीम 17140 |
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| विकल्प पत्रक और सहमति पत्रक साभार टीम 17140 |
2- खंड शिक्षा अधिकारी को संबोधित प्रत्यावेदन
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| उदाहरण हेतु प्रत्यावेदन : साभार टीम 17140 |
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| प्रत्यावेदन पत्रक : साभार टीम 17140 | | | |
- पायलट प्रोजेक्ट के तहत विद्यालय प्रबंध समिति को दी गई जिम्मेदारी
- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ऐसे विद्यालयों का करेंगे चयन
- प्रत्येक मंडल से दो सक्रिय एसएमसी का किया जायेगा चयन
लखनऊ। स्कूल न जाने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने और उनका दाखिला प्राइमरी स्कूलों में कराए जाने के लिए हर साल किए जाने वाले हाउस होल्ड सर्वे का काम इस बार अभिभावक भी संभालेंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह काम विद्यालय प्रबंध समिति के जरिए कराया जाएगा। इसमें 14 सदस्यों में से 11 अभिभावक भी शामिल होते हैं। इसके लिए वर्ष 2014-15 में पायलट प्रोजेक्ट के जरिए प्रदेश के प्रत्येक मंडल से दो कार्य करने वाली एसएमसी का चयन किया जाएगा।
राज्य परियोजना निदेशक हरेंद्र वीर सिंह ने 7 जून तक ऐसी एसएमसी की सूची देने के निर्देश दिए हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत हर साल स्कूल न जाने वाले बच्चों को शिक्षित करने के उद्देश्य से उन्हें चिन्हित करने के लिए हाउस होल्ड सर्वे कराया जाता है।इसकी जिम्मेदारी परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षामित्रों की होती है। लेकिन इस बार पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह कार्य विद्यालय प्रबंध समतियों से कराने का फैसला किया गया है। इसके तहत 18 मंडलों में से प्रत्येक मंडल के दो विद्यालयों में हाउस होल्ड सर्वे विद्यालय प्रबंध समितियों द्वारा कराया जाएगा। इस कार्य के लिए प्रत्येक मंडल से दो सक्रिय एसएमसी का चयन किया जायेगा। राज्य परियोजना निदेशालय की ओर से भेजे गए निर्देशों के मुताबिक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ऐसे विद्यालयों का चयन करेंगे जहां पर एसएमसी के माध्यम से हाउस होल्ड सर्वे होना है। साथ ही चयनित विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों का नाम, पता व शैक्षिक योग्यता सहित पूरा ब्यौरा भी भेजना होगा। विभाग के एक अधिकारी कहते हैं कि विद्यालयों में एसएमसी को और सक्रिय करने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है।
- एसएमसी में होते हैं 14 सदस्य
प्रत्येक विद्यालय प्रबंध समिति में 14 सदस्य होते हैं। इनमें 11 अभिभावक (जिनमें 50 प्रतिशत महिलाएं अनिवार्य), 1 स्कूल का हेड या वरिष्ठतम शिक्षक, एकएएनएम, लेखपाल व स्थानीय प्राधिकारी की ओर से निर्वाचित सदस्य का प्रतिनिधि शामिल होता है।
खबर साभार : डेली न्यूज एक्टिविस्ट
बेसिक शिक्षा परिषद की बैठक 11 जून को होगी। जिसमें शिक्षकों के अंतर जनपदीय स्थानांतरण, स्कूलों को मान्यता देने, शिक्षा के अधिकार के हिसाब से स्कूलों में शिक्षकों के पद सृजन समेत विभिन्न मुद्दों पर मंथन होगा।
खबर साभार : अमर उजाला कॉम्पैक्ट
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